हूण एशिया की एक आदिम जाति थी


हूण एशिया की एक आदिम जाति थी जिसने ईसा की चौथी और पाँचवीं शताब्दी में सारे संसार में अपना प्रताप फैलाया था। हूण बहुत ही खूंखार और क्रूर योध्दा थेI हूणों ने बहुत हत्याकांड किए थेI लेकिन वो समय ही ऐसा थाI मनुष्य जिस वातावरण में रहता है वैसा वो बनता हैI सारे संसार में गाथ( जाट), मंगोल(मुगल) इत्यादि जैसे खूंखार योध्दाओं ने हलचल मचाई थीI हूण ही क्या शुरू में मनुष्य प्राणी ही असभ्य थाI सिद्ध परंपरा(सिंधु सभ्यता) और वैदिक परंपरा(सरस्वती सभ्यता) ने भटकते आदमी को सभ्य बनायाI सभ्य मनुष्य को आर्य कहा गयाI बाद में हूणों ने भारत को अछे योद्धा दियेI हूण शैव थे और बुद्ध धर्म के प्रखर विरोधी थेI 

यूरोप का प्रसिद्ध इतिहास लेखक गिबन इन हूणों के विषय में लिखता है:-“सारे यूरोप में गाथ( जाट) और वेंडल नामक असभ्यों ने उपद्रव मचा रखा था। पर वे भी हूणों के सामने भागे(जाट पश्चिम यूरेशिया मे गाथ कहलाये)।

अटिला के राजत्वकाल में उन्होंने फिर संसार को हिला डाला। उनके आक्रमणों से एशिया और यूरोप दोनों महाद्वीपों में हलचल मच गई और रोमन साम्राज्य का पतन हुआ।”

“इन हूणों का प्रवाह चीन की सीमा से चलकर जर्मनी तक पहुँचा था। इनके जो सबसे प्रबल दल थे वे रोमन साम्राज्य की सीमाओं पर जम गए थे। कुछ दिनों तक रोमन सम्राट दान नीति का अवलम्बन करके अपने प्रदेशों की रक्षा करते रहे। पर हूण लोग जितना ही पाते गए उतना ही तंग करते गए।”
धनगर/गुर्जरों मे हूण/हूणमाने वंश पाया जाता हैI


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