सिन्ध से शकों की शक्ति का विस्तार काठियावाड़, गुजरात, कोंकण, महाराष्ट्र और मालवा में हुआ, और वहाँ से उत्तर की ओर मथुरा में। सम्भवतः उज्जयिनी की विजय के बाद ही शकों ने मथुरा पर अपना आधिपत्य स्थापित किया था। इन क्षत्रपों के बहुत से सिक्के मथुरा व उसके समीपवर्ती प्रदेशों से उपलब्ध हुए हैं।
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