एक समय था जब अधिकांश भारतवासी बौद्ध थे।
एक समय था जब अधिकांश भारतवासी बौद्ध थे। और बौद्ध धर्म ने ब्राह्मणवाद पर ऐसे आक्रमण किए जो पहले किसी ने नहीं किए। बौद्ध धर्म के विस्तार के कारण ब्राह्मणों का प्रभुत्व न दरबार में रहा न जनता में। वे इस पराजय से पीड़ित थे और अपनी प्रतिष्ठा पुनः प्राप्त करने के प्रयत्नशील थे।
इसका एक ही उपाय था कि वे बौद्धों के जीवनदर्शन को अपनाएं और उनसे भी चार कदम आगे बढ़ जाएं। बुद्ध के परिनिर्वाण के बाद बौद्धों ने बुद्ध की मूर्तियां और स्तूप बनाने शुरू किये। ब्राह्मणों ने उनका अनुकरण किया। उन्होंने शिव, विष्णु, राम, कृष्ण आदि की मूर्तियां स्थापित करके उनके मंदिर बनाये। मकसद इतना ही था कि बुद्ध मूर्ति पूजा से प्रभावित जनता को अपनी ओर आकर्षित करें। जिन मंदिरों और मूर्तियों का हिंदू धर्म में कोई स्थान न था, उनके लिए स्थान बना।
https://www.facebook.com/vinaykumar.madane/posts/620139154785170
इसका एक ही उपाय था कि वे बौद्धों के जीवनदर्शन को अपनाएं और उनसे भी चार कदम आगे बढ़ जाएं। बुद्ध के परिनिर्वाण के बाद बौद्धों ने बुद्ध की मूर्तियां और स्तूप बनाने शुरू किये। ब्राह्मणों ने उनका अनुकरण किया। उन्होंने शिव, विष्णु, राम, कृष्ण आदि की मूर्तियां स्थापित करके उनके मंदिर बनाये। मकसद इतना ही था कि बुद्ध मूर्ति पूजा से प्रभावित जनता को अपनी ओर आकर्षित करें। जिन मंदिरों और मूर्तियों का हिंदू धर्म में कोई स्थान न था, उनके लिए स्थान बना।
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