राजपूतो ने मुगलों के यहाँ अपनी लडकियों की शादी करनी शुरू कर दी थी तो मुगलों ने राजपूतो को सशर्त अपने झंडे के निचे छोटे छोटे राज्यों पर agents के रूप में बिठा दिया था
चूँकि राजपूतो ने मुगलों के यहाँ अपनी लडकियों की शादी करनी शुरू कर दी थी तो मुगलों ने राजपूतो को सशर्त अपने झंडे के निचे छोटे छोटे राज्यों पर agents के रूप में बिठा दिया था. और यही राजस्थान में हुआ अनेको चौहान, परमार, गुर्जरों ने खुद को राजपूत कहना शुरू कर दिया था (हलाकि आम गुर्जर अभी भी गुर्जर शब्द पर ही डटा हुआ था. चूँकि जब तक गुर्जर प्रतिहार साम्राज्य अपने चरम पर रहा तब तक साम्राज्य में चारो तरफ सुख शांति और समृधि का बोलबाला रहा जैसा की मिहिर भोज के समय में आने वाले विदेशी यात्रियों ने भी गुर्जरदेश के बारे में लिखा है लेकिन स्वतंत्र होने के बाद इन छोटे छोटे राजपूत सामंतो ने ब्राह्मणों के साथ मिलकर राजस्थान में गरीब, दलित वर्ग का शोषण करने के सिवाय करने के सिवाय कोई भी उच्च स्तर का कार्य नहीं किया सिवाय ब्रह्मणो से अपना झूठा इतिहास लिखवाने के.. हालाँकि राजपूत अपने मुह मिट्ठू बनते हैं और खुद को बेसिर पैर के तर्कों से रामायण और महाभारत से जोड़ते हैं परन्तु हकीकत में कभी राजस्थान को भी एक ना कर पाए कभी मुघलो या अंग्रेजो के खिलाफ कोई संगठित राजपूत स्वर नहीं उठा जबकि समस्त उत्तर भारत में १८५७ का गुर्जर संघर्ष सर्व विदित है. गुर्जरों को १८५७ में अपराधिक जाति घोषित कर दिया गया था उस समय सिंधिया, जडेजा और अधिकतर राजपूत घराने अंग्रेजो की चिलम भरते थे. 1400-1500 ईस्वी में राजपूत राजस्थान और गुजरात में मुगलों के एजेंट के रूप में स्थापित हो गए थे यही वो समय था जब मध्य प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार की भी अनेको जनजातियाँ खुद राजपूत कहलवाने लगी. आज राजपूतो के डीएनए टेस्ट करो राजस्थान और गुजरात के अधिकतर राजपूतो के पूर्वज गुर्जर निकलेंगे और पंजाब, हरयाणा में अनेक राजपूतो के पूर्वज जाट, गुर्जर कम्बोज आदि निकलेंगे
गटर में रहने वाले क्या फैसला करगे की कोण किसका पूर्वज है
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