जातियों का उदय
जातियों के उदय के तीन मुख्य कारण हैI पहला कारण है वंश का एक होनाI दुसरा कारण है व्यवसायI कुछ भिन्न वंश के लोग एक ही व्यवसाय के कारण एक हो गयेI तीसरा कारण है युद्धI प्राचीन काल में पशुधन(Cattle wealth) को बहुत महत्व थाI पशुधन के लिए दो पशुपाल समूह में युद्ध होता थाI युद्ध में ज्यादातर पुरुषों की मृत्यु हो जाती थी लेकिन विधवा स्त्रियों और अनाथ बच्चों को सहारा दिया जाता थाI ऐसे बच्चों से समूह की संख्या और शक्ति तो बढ़ती थी लेकिन ऐसे बच्चों को पशुधन का बहुत ही कम हिस्सा मिलता थाI ऐसे लोग कोई और व्यवसाय करते थेI
ब्राह्मण, खाटीक(Butcher), चमार(Tanner/Leather-Workers) और नाई(Barbers) या तो एक ही वंश के लोग है या भिन्न वंश के लोग एक ही व्यवसाय के कारण एक हो गयेI नाई और चमड़े का काम पहले ब्राह्मणों का मुख्य व्यवसाय थाI इसका वेदों में वर्णन मिलता हैI(The Brahmins are the racially of the same stock as the Chamar)
ये चारो जातियों में अनुवांशिकता और शारीरिक विशेषता में बहुत साम्य है जैसे की सफेद रंग, भूरी आँखें इत्यादिIखटिक जाति मूल रूप से वो ब्राहमण जाति है, जिनका काम आदि काल में याज्ञिक पशु बलि देना होता था। वैश्य भी इनसे काफी मिलते हैI
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